खुदी का पैगाम .

वो मदहोशी जिस्म मे गिर गयी
जब कोई बेशक गुमान  रेहता हे
एक हाई केहनेसे कोई फरक नही पडता
गूसा खुंखार की और बांढता हे जब कोई जुबान नही खोलता
बेशक आते होंगे परिनदे अनजाने याहा हरवक्त हरकिसम के
दिल पानी होके बेहता हे जब कोई अपनी निंदे नही खोलता
आते हे नये ताराने नये आयनेके साथ
दिलके तरजूबे बदलते हे हरवक्त नये बहादुरी के साथ
मरते हे बेकसुर याहा हर एक नये लफज के साथ
बेनकाबी आनेसे डरती हे याहा नये असूओंके साथ
दिवारे टूतती हे चिललाके उसिले तरानम के याहा
मंजिले हौसेला तोडती हे किसींकी
तब हजारो हौसलो की हसी टूट ज्याती हे ।।
@हृषीकेश  8.12.2017   7.55 PM....

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